
आहान अपनी बात पूरी कर पाती उससे पहले ही एक चटाक की आवाज पूरे हॉल में गूंज जाती है, सब हैरानी से माही और आहना को देख रहे थे.
जहां माही गुस्से से कांप रही थी वही आहना इस वक्त आपने गाल पर हाथ रख जमीन पर गिरी हुई थी.
कोई कुछ कर पता उसे पहले ही माही आहान के पास जा उसके बालों को बेरहमी से पकड कर उसे खडा करती है.
आहान के साथ ऐसा सलूक होता देख कपूर फैमिली के साथ साथ राजावत खानदान के लोगों को भी गुस्सा आने लगा, स्पेशली राधिका राजावत को क्योंकि आहना उनके भाई की बेटी थी. भले ही वो उसे ज्यादा पसंद ना करती हो फिर भी वो उनके भाई की बेटी थी उन्हें गुस्सा आना लाजमी था.
राधिका राजावत थोडी सख्त आवाज में माही से बोलने लगी" माही यह आप क्या.
राधिका जी आगे कुछ कह पाती उससे पहले ही माही चीखते हुए बोली" चुप एक दम चुप अगर किसी ने एक शब्द भी कहा आई सवेर उसकी हालत का जिम्मेदार वो खुद होगा"
इतना बोल वह एक टक आहना को गुस्से से घूरने लगी उसके हाथ अभी भी आहना के बालों में थे.
आहना दर्द से रोए जा रही थी उसे इस तरह रोते देख माही के पापा वरुण गुस्से से उसे बोले" माही. छोरो आहना के बालों को उसे दर्द हो रहा है"
माही उनकी बातों को नजर अंदाज कर आहना के बालों पर अपनी पकड कसते हुए दांत पिसते हुये बोली" दर्द हो रहा है होना भी चाहिए आखिर इसकी हिम्मत कैसे हुए मेरी कायू को क्रिमिनल कहने की"
स्टॉप ईट" किसी की भरी भरकम और रूखी आवाज पूरे हॉल में गूंज उठी. सबने जब नजर घुमाकर देखा तो,यह ये कोई और नहीं बल्कि अधिराज सिंग राजावत था. अधिराज अपनी जगह से उठते हुए माही के पास आया और उसे घूरते हुए बोला" मिस माही कपूर यह आपका घर नहीं है जहां आप जो मर्जी आ वो कर सकती है, यह होटल है और उससे भी बडी बात यह कपूर फैमिली के अलावा भी दूसरे लोग मौजूद है, do you have any idea अगर यह बात बाहर गई तो हम सबकी रेपुटेशन का क्या होगा"
अधिराज जो कि किसी से ज्यादा मतलब नहीं रखता था यह तक कि किसी के मामले में जल्दी नहीं पडता था लेकिन जब उसने देखा कि सबकी वजह से उसकी mom परेशान हो रही है तोह वह खुद को रोक नहीं पाया और न चाहते हुए भी उसे बीच में बोलना परा.
"वहां वहां वहां क्या बात है. आज आज तोह मैं धन्य हो गई जो mr. अधिराज सिंह राजावत ने किसी के मामले में बोला wow" आहना को छोड माही ताली बजाते हुए sarcastic way में बोली.
माही की बात सुन अधिराज कुछ बोलने को हुआ मगर उससे पहले ही माही गुस्से से उसे घूरते हुए बोली" mr. Adhiraj singh rajawat mind your own business. जैसे आप पंद्रह साल पहले चुप थे उसी तरह आज भी चुप चाप अपने काम से काम रखे"
माही यह किस तरह तुम अधिराज से बात कर रही हो" वरुण जी माही पर चिल्लाते हुए बोले.
लेकिन इस बार माही नहीं बल्कि माही की जगह सौम्या गुस्से से बोली" क्या गलत कहा माही दी ने अंकल हा बताइए क्या गलत बोल दी ने. कायू की लाइफ को बर्बाद करने के पीछे जितना इन लोगों का हाथ है न( पिया जी, मानसी जी, आहना, नताशा की और इशारा करते हुए) उतने ही जिम्मेदार यह so called बिजनस टायकून mr. Adhiraj singh rajawat भी है।
यह क्या बकवास कर रही हो तुम" पिया जी ने सौम्या को डांटते हुए कहा.
जिसे सुन सौम्या गुस्से से बोली" बकवास, बकवास नहीं सच कह रही हु. अगर उस दिन उन्होंने चुप न रहते अनजान न बनते हुए सबको सच बता दिया होता तोह न कायू को अब्रॉड भेजा जाता न उसके साथ वो सब होता और न वो खुद को बचाने के लिए इतना बडा क्राइम करती. सारे फसाद की जड mr. अधिराज ही है फिर भी इनको जीरो परसेंट इसका गिल्ट नहीं है और ना ही इस बात की फिक्र कि इनकी चुप्पी की वजह से किसी की लाइफ हेल बन गई.
सौम्या की बातो पर सब खामोश हो गए यह तक कि अधिराज भी चुप होकर एक तक फ्लोर को घूर रहा था.
तभी माही सौम्या के कंधे पर हाथ रख एक कडवी स्माइल के साथ कपूर फैमिली को देखते हुए बोली" क्या सौम्या तुम उनसे गिल्ट और फिक्र कि उम्मीद कर रही हो जो पराए है आरे यह तोह सगी मां को उसकी बेटी की फिक्र नहीं वो तोह यह आराम से खा पी सो रही है उनको अपनी बेटी से कोई मतलब ही नहीं है कि वो कैसी है, खाना खाया या नहीं आरे इन्हें तोह इस बात से भी कोई फर्क नहीं पडता होगा कि इनकी बेटी जिंदा होगी भी या नहीं. यह तोह दूसरे की बेटी में इतना खो गई कि इन्हें खुद की बेटी का भी ध्यान नहीं जिसकी पिछले सात साल से कोई खबर ही नहीं है"
सौम्या भी माही के साथ बोली" आरे दी आप सिर्फ मां को क्यों बोल रही हो अरे उसके बाप, भाई आरे sorry sorry आप लोगो का नाम ले लिया आपको तोह शुरू से ही उससे कोई मतलब नहीं था. आप लोगो ने तोह शुरू से ही आहना नाम की माला जपने में लगे थे"
अरे भगवान लोगो को बत से बत्तर दुश्मन दे मगर आप जैसी फैमिली किसी को न दे। इतना कह कर माही वहां से बाहर की और चली गई उसे पीछे पीछे सौम्या भी निकल गई.
तभी सौम्या के पापा mr रितेश sen ji कुछ बोलने को हुए उससे पहले ही अर्जुन जी ने उन्हें टोकते हुए कहा" अरे आपको माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है सौम्या तोह बच्ची है कुछ भी बोल दिया हमे."
"अर्जुन मैं सौम्या की वजह से शर्मिंदा नहीं हु मैं उसकी बातों से पूरी तरह सहमत हु. मैं तोह तुमसे यह पूछने वाला था कि अगर तुम लोगों को काया से कोई मतलब ही नहीं रखना तह तोह उस बेचारी बच्ची को पैदा ही क्यों किया उसे पेट में ही मर देते"
"हे भगवान यह कैसी बाते कर रहे हो तुम रितेश" अपूर्ण जी आंखे बरी करते हुए बोली" हम भला बच्चे को कोख में मारकर अपने सिर पर पाप क्यों लेते"
अपूर्णा जी बात सुन माही की मां mrs. पायल सेन हस्ते हुए बोली" अच्छा माजी तोह आपकी नजर में बच्चे को कोख में मर कर उसे आगे के दुख दर्द भोगने से बचाना पाप है पर आप मुझे यह बताए कि उसे इस दुनिया में ला कर मौत से भी बत्तर जिंदगी देकर कौन सा अपने पुण्य काम लिया।
"आंटी आप गलत सोच रही है हमे काया से कोई प्रॉब्लम नहीं थी but आप toh जानती है न वो कितनी मोटी थी वो कितनी ऊटपटांग बाते करती थी उसकी आवाज तक भी क्लियर नहीं थी उसकी वजह से हमे हाई सोसाइटी में embarace होना पड़ता था " इस बार बैभाव बीच में आते हुए बोला.
"अच्छा मतलब तुम एक पाँच साल की बच्ची से ये उम्मीद कर रहे हो कि उसकी जीरो फिगर हो या तुम उससे यह उम्मीद कर रहे हो कि उसकी आवाज लता मंगेश्र के जैसी हो हां. अरे वो बच्ची थी बच्चों में ये नॉर्मल होता है तुम जिसे मोटी कह रहे हो न उसे चबी क्यूट होना बोलते है और वह बच्ची थी बच्चों के जैसे ही बोलेगी न कि बुजुर्गों की तरह. अरे शर्म करो तुम्हारा खुद का भी बच्चा है तुम्हारी लैंग्वेज में में कहे तो वो भी मोटा ही है जरा गैर से देखो उसे" इतना बोल पायल जी वह से गुस्से से निकल गई उनके पीछे रितेश जी भी चले गए.
धीरे धीरे सभी वहां से निकल गए सिवाय कपूर्स के.
तभी मोहन कपूर सीरियस टोन में बोले" US call करो और उसे वापस आने को कहो" इतना बोल वो वह से चले गए.
क्या हुआ था चौदह साल पहले....?


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