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Unspoken feelings

दरवाज़े पर खड़े अधिराज और काया दोनों ही अंदर का नज़ारा देखकर कुछ सेकंड के लिए बिल्कुल चुप रह गए। उनके चेहरों पर साफ़ disbelief था—जैसे जो वो देख रहे हैं, उस पर यकीन करना मुश्किल हो।

केबिन के अंदर का सीन किसी अजीब सी कॉमेडी फिल्म से कम नहीं था। फ्लोर पर प्रीतम, भैरव और शिवम एक-दूसरे में ऐसे उलझे पड़े थे जैसे किसी ने उन्हें जबरदस्ती बांध दिया हो। शिवम नीचे दबा हुआ था, उसका चेहरा किसी तरह प्रीतम की thighs के बीच से बाहर निकला हुआ था और उसने प्रीतम के पैरों को कसकर पकड़ रखा था। वहीं भैरव पूरे आराम से प्रीतम के ऊपर बैठा हुआ था, जैसे उसे इस पूरे chaos में मज़ा आ रहा हो।

बेचारा प्रीतम दोनों से छूटने के लिए बेतहाशा झटपटा रहा था, लेकिन उसकी हालत और खराब तब हो रही थी जब भैरव और शिवम मिलकर उसे चिढ़ाते हुए गाना गा रहे थे—

“प्रीतम का कुछ दोष नहीं है… वो तो है निर्दोष…”

प्रीतम झुंझलाकर चिल्लाया, “बस करो यार तुम दोनों!”

लेकिन उनकी आवाज़ और तेज़ हो गई—

“साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम…”

काया ने ये सब देखा तो उसके चेहरे पर एक अजीब सा expression आ गया—shock और confusion के बीच कुछ। उसने धीरे से अपनी नज़र अधिराज की तरफ घुमाई, जैसे पूछ रही हो—“ये सच में तुम्हारे दोस्त हैं?”

अधिराज खुद भी अंदर से उतना ही हैरान था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि हंसे या शर्मिंदा हो। तभी उसे एहसास हुआ कि काया उसे देख रही है। उसने तुरंत उसकी तरफ देखा और एक awkward silence दोनों के बीच आ गया।

उस awkwardness से बचने के लिए अधिराज ने बिना ज्यादा सोचे काया का हाथ पकड़ लिया और जल्दी से उसे वहां से बाहर ले जाते हुए बोला,

“Miss Kapoor… चलिए, हम कहीं और lunch करते हैं… a better place.”

काया की नज़रें तुरंत उसके हाथ पर टिक गईं—उस हाथ पर जिससे अधिराज ने उसका हाथ थामा हुआ था।

वो एक पल के लिए बिल्कुल स्थिर रह गई।

उसे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था। वो काया, जो किसी का touch सहन नहीं कर पाती थी, जिसे छूते ही गुस्सा आ जाता था… आज वही काया बिल्कुल शांत थी। ना कोई irritation, ना कोई resistance।

बल्कि… उसके अंदर कुछ और ही हो रहा था।

उसकी उंगलियों से एक हल्की सी गर्माहट उसके दिल तक जा रही थी। एक अजीब-सी feeling… unfamiliar, yet comforting.

उसने अपना हाथ नहीं छुड़ाया।

कुछ ही देर में दोनों “Love Forever Restaurant” पहुंचे। यह जगह अपने नाम की तरह ही प्यार में डूबे हुए लोगों के लिए मशहूर थी। हल्की रोशनी, soft music, और cozy atmosphere—सब कुछ ऐसा था जो दो लोगों को एक-दूसरे के और करीब ले आए।

Private room में बैठने के बाद भी काया का ध्यान बार-बार उसी moment पर जा रहा था। वो कोशिश कर रही थी कि खुद को normal दिखाए, लेकिन उसके अंदर कुछ बदल रहा था।

अधिराज ने प्लेट उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा,

“You should try this… it’s really good. यहाँ का famous dish है।”

काया ने बिना कुछ कहे एक bite लिया, लेकिन उसका ध्यान खाने पर नहीं था। वो अधिराज को observe कर रही थी—उसके expressions, उसकी awkwardness, उसकी कोशिशें।

कुछ सेकंड की खामोशी के बाद उसने casually पूछा,

“आप पहले भी यहाँ आ चुके हैं, Mister Rajawat?”

सवाल सुनते ही अधिराज थोड़ा हड़बड़ा गया। उसका दिमाग एक सेकंड के लिए blank हो गया। वो यहाँ पहले आ चुका था… लेकिन वो बात काया को बताना नहीं चाहता था।

उसने जल्दी से खुद को संभालते हुए कहा,

“Actually… मैंने इसके बारे में अपने friend से सुना था… that’s why I know.”

काया ने हल्के से सिर हिलाया,

“Oh… I see.”

लेकिन अंदर ही अंदर उसे एक अजीब-सी राहत महसूस हुई। वो खुद भी नहीं समझ पाई कि ऐसा क्यों हुआ… लेकिन ये जानकर कि अधिराज यहाँ किसी के साथ नहीं आया था, उसके दिल को सुकून मिला।

उसके होंठों पर एक हल्की-सी मुस्कान आई, जो शायद उसने खुद भी notice नहीं की।

दोनों धीरे-धीरे बातें करते हुए खाना खाने लगे। माहौल अब पहले जैसा awkward नहीं था—बल्कि surprisingly comfortable था।

बातों ही बातों में अधिराज ने हिम्मत जुटाकर पूछा,

“Can I have your number…?”

काया कुछ सेकंड के लिए चुप रही। Normally, वो ऐसे सवालों को avoid कर देती थी। लेकिन आज…

“Hmm… okay,” उसने धीरे से कहा और अपना नंबर बता दिया।

अधिराज की खुशी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी, लेकिन उसने उसे control करने की पूरी कोशिश की।

Lunch के बाद अधिराज ने काया को Alpha Group drop किया और फिर खुद Rajawat Industries के लिए निकल गया। कार में ज्यादा बातचीत नहीं हुई, लेकिन silence uncomfortable नहीं था।

काया खिड़की के बाहर देख रही थी, लेकिन उसका ध्यान बाहर नहीं था। उसके दिमाग में सिर्फ एक ही चीज़ घूम रही थी—

वो touch…

वो feeling…

और अधिराज।

वहीं दूसरी तरफ Kapoor House में माहौल बिल्कुल अलग था।

आहना सोफे पर बैठी रो रही थी, उसकी आंखें लाल हो चुकी थीं। पिया जी उसे शांत कराने की कोशिश कर रही थीं।

“आहना, please शांत हो जाओ… वैभव और तुम्हारे नानू कोई ना कोई solution जरूर निकाल लेंगे।”

आहना ने रोते हुए सिर हिलाया,

“No Mami… Kaya किसी की बात नहीं मानेगी… सब मेरा मजाक बनाएंगे… मैंने अपने friends को बता दिया था कि मैं Alpha Group की brand ambassador बनने वाली हूँ…”

उसकी आवाज़ में डर साफ झलक रहा था—डर मजाक बनने का, और शायद खुद के illusion टूटने का भी।

तभी माही वहां आई और हंसते हुए बोली,

“वाह… drama फिर से शुरू हो गया?”

पिया जी ने तुरंत उसे डांटा,

“माही! ये क्या तरीका है बात करने का?”

माही ने बिना परवाह किए जवाब दिया,

“तमीज़ और तरीके की बात आप ना ही करें तो बेहतर है।”

पिया जी ने गहरी सांस ली,

“देखो माही, आहना पहले से परेशान है… तुम थोड़ी देर के लिए शांत रह सकती हो?”

माही हल्के से हंस पड़ी,

“ये अपनी वजह से परेशान हुई है… अब भुगते। इतनी ही problem है तो अपने घर जाकर बात करे… यहाँ क्यों आई है?”

आहना ने innocent बनने की कोशिश करते हुए कहा,

“माही दी… इसमें मेरी क्या गलती? मैं तो बस अपनी feelings share कर रही थी…”

माही ने उसकी तरफ देखते हुए आंखें roll कीं,

“Oh please… ये drama कहीं और करना। मुझे अच्छी तरह पता है तुम कौन-सी ‘feelings’ share कर रही थी।”

आहना चुप हो गई, लेकिन उसकी आंखों में frustration और insecurity साफ दिखाई दे रही थी।

एक तरफ काया थी—जो पहली बार किसी के touch को बिना गुस्से के महसूस कर रही थी…

और दूसरी तरफ आहना—जिसकी बनाई हुई दुनिया धीरे-धीरे टूट रही थी।

और इन दोनों के बीच कहीं…

अधिराज था—

जो अभी तक ये नहीं समझ पाया था कि वो काया की जिंदगी में क्या बनने वाला है।

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